(Nana-ke-Bol) Keep Good Company – Always!

 

हकीम लुकमान था बड़ा दयालू 

सबका था हितकारी

अच्छी शिक्षा के संग-संग 

करता था दूर बिमारी |

उसका बेटा था अकलमंद 

सुशील और आज्ञाकारी 

एक दिन लुकमान ने उसे बुलाया 

और शिक्षा दी हितकारी |

एक हाथ में चन्दन की लकड़ी पकड़ाई 

और दूसरे हाथ में कोयला 

फिर उनको फेंकवा कर बेटे से 

हकीम लुकमान यूं बोला |

कोयले वाली हाथ की संगति से 

हाथ हुआ है काला 

चन्दन वाले हाथ को सूंघो 

हुआ सुगन्धिवाला |

यह दिखलाकर लुकमान ने बेटे को 

संगति का पाठ पढ़ाया 

दुर्जन और सज्जन के संग रहने का 

भेद बताया |

दुनिया में खुश रहना है तो 

सत्संग को अपनाओ 

जगहित के कार्य करो 

और जीवन सफल बनाओ |

(Nana-ke-Bol) Trees – our Inspiration!

Hello

I love trees. They inspire us to be selfless like them. Nana wrote a poem today.

Parth

वर्षा का मौसम है आया 

आओ वृक्ष लगाएं 

सदभावना भाव पेड़ों से सीखें 

सुन्दर स्वर्ग बनाएं |

तपती धूप में खड़ा वृक्ष 

संतोषी भाव से रहता 

बिन मांगे हर राही को 

छाया से सहलाता |

पत्थरों को चोट सह कर भी 

फलों से स्वागत करता 

काटपीट से अविचलित रहकर 

लकड़ी के भण्डारों को भरता |

दूषित वायु अपने में लेकर 

बुराइयों को है हरता 

जीवन दायनी ‘आक्सीज़न’ बनाकर 

प्राणों की रक्षा करता |

पक्षियों को बसेरा देकर 

मधुर संगीत से भर जाता 

हवा से झोंको के संग 

यही ध्वनि सुनाता |

परहित में रहने से ही मन को 

असली सुख मिल पाता |